मीठी ईद के 2 महीने बाद बकरी ईद मनाई जाती है. यह त्यौहार इस्लाम धर्म में सबसे बड़ा त्यौहार माना जाता है. अधिकतर जगह बकरे की कुर्बानी देकर इस ईद को मनाया जाता है लेकिन कई जगह पर भैंस, बैल आदि की भी कुर्बानी दी जाती है. हिन्दू धर्म में ज्यादातर लोगों को यह कुर्बानी देना पसंद नहीं है. क्या आप लोग जानना चाहेंगे की आखिर ईद के दिन ऐसे जानवरों की कुर्बानी को क्यों दी जाती है. आइये जानते है...
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ईद के दिन इस तरह से कुर्बानी देने के रिवाज पूरी दुनिया में है. वैसे तो इस्लाम धर्म में बकरे के अलावा ऊंट की भी बलि दी जाती है. लेकिन बकरे की कुर्बानी देने के पीछे एक कहानी है जिसके बारे में शायद आप लोगों को पता नहीं होगा. इस कहानी का मुख्य किरदार है असलम.
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कहानी कुछ इस प्रकार की है की एक दिन असलम के सपने में अल्लाह आये और उन्होंने असलम से उनके बेटे की कुर्बानी मांगी. असलम ने अल्लाह की बात मानी और छुरी लेकर अपने बेटे की कुर्बानी देने लगे. तभी अल्लाह के फरिश्तों ने असलम के बच्चे को हटा दिया और उसके स्थान पर एक मेमना रख दिया.
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इस प्रकार अल्लाह को पहली कुर्बानी मिली एक मेमने के रूप में. इसकी वजह से अल्लाह बहुत खुश हुए. ऐसा माना जाता है की जिस बकरे की कुर्बानी दी जाती है उसे किसी प्रकार की कोई बीमारी नहीं होनी चाहिए अन्यथा अल्लाह बुरा मान जाते है. साथ ही बकरा दुबला पतला भी नहीं होना चाहिए. बकरा बहुत ही छोटा भी नहीं होना चाहिए. उसके कम से कम 4 दांत होना बहुत ही जरुरी है.
ईद मुबारक: आखिर क्यों दी जाती है ईद के दिन बकरे की कुर्बानी, सच्चाई जानकर खुश हो जायेंगे
Reviewed by Cricket Speed
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August 11, 2019
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